किडनी की छानने की क्षमता और पेशाब में प्रोटीन की मात्रा अलग बातें हैं। दोनों नतीजों को पुरानी रिपोर्ट और स्वास्थ्य जानकारी के साथ समझना उपयोगी है।
खून की रिपोर्ट में किडनी वाला हिस्सा सामान्य दिखे तो क्या दूसरी जाँच की जरूरत नहीं है? या बिना किसी परेशानी के एक अंक कम आ जाए तो क्या किडनी की बीमारी पक्की है? दोनों सवालों का जवाब देने से पहले यह समझना जरूरी है कि रिपोर्ट में क्या मापा गया है।
किडनी की सामान्य जाँच में अक्सर खून से छानने की क्षमता का अनुमान और पेशाब में एक तरह के प्रोटीन का माप साथ देखा जाता है। दोनों एक-दूसरे की जानकारी पूरी करते हैं। हर खून के पैकेज में पेशाब वाली जाँच शामिल नहीं होती, इसलिए रिपोर्ट के नाम ध्यान से देखें।
सीधे शब्दों में
खून में क्रिएटिनिन, यानी मांसपेशियों के सामान्य काम से बनने वाला अपशिष्ट, मापा जाता है। इसके साथ उम्र और लिंग जैसी जानकारी लेकर किडनी की छानने की क्षमता का अनुमान निकाला जाता है। रिपोर्ट में इसे eGFR लिखा मिल सकता है।
पेशाब की जाँच में एल्बुमिन नाम के प्रोटीन और क्रिएटिनिन का अनुपात मापते हैं। इसे ACR या UACR कहते हैं। पहली जाँच छानने के काम का अनुमान देती है, दूसरी किडनी की परेशानी का एक संकेत पकड़ सकती है। eGFR प्रतिशत नहीं है और इसे बची हुई किडनी का प्रतिशत मानना गलत है।
किन लोगों को जाँच की योजना पर बात करनी चाहिए?
डायबिटीज़, ऊँचा रक्तचाप, दिल की बीमारी या परिवार में किडनी फेल होने का इतिहास हो तो डॉक्टर से उपयुक्त जाँच पर बात करें। शुरुआती किडनी समस्या में साफ लक्षण न हों, इसलिए दर्द आने का इंतजार सही तरीका नहीं है।
डायबिटीज़ में नियमित किडनी समीक्षा महत्वपूर्ण है। समय बीमारी के प्रकार, अवधि, पुराने नतीजों और चल रही देखभाल पर निर्भर होता है। डायबिटीज़ की अगली जाँच और रक्तचाप की पुष्टि अलग लेकिन संबंधित हिस्से हैं। हर स्वस्थ व्यक्ति को एक जैसा बड़ा पैकेज जरूरी नहीं है।
खून और पेशाब के नतीजे क्या बताते हैं?
क्रिएटिनिन का अंक मांसपेशियों की मात्रा और दूसरे कारणों से प्रभावित हो सकता है। इसलिए एक ही सामान्य संख्या सबके लिए उपयुक्त नहीं है। गणना से निकला छानने का अनुमान ज्यादा जानकारी देता है, फिर भी उसकी सीमाएँ होती हैं। डॉक्टर पूरे संदर्भ में उसे पढ़ते हैं।
| रिपोर्ट का हिस्सा | किस बात में मदद करता है? |
|---|---|
| खून का क्रिएटिनिन | छानने का अनुमान निकालने में इस्तेमाल होने वाला अपशिष्ट माप |
| छानने का अनुमान | किडनी का काम कितना है, इसका अनुमान; यह प्रतिशत नहीं है |
| पेशाब का एल्बुमिन अनुपात | पेशाब के क्रिएटिनिन के मुकाबले एल्बुमिन की मात्रा |
| पुरानी रिपोर्टें | बदलाव और कितने समय से असामान्यता है, इसकी जानकारी |
खून का क्रिएटिनिन सामान्य दिखना, जरूरत वाली पेशाब की जाँच की जगह नहीं लेता। पेशाब की साधारण पट्टी वाली जाँच भी हमेशा मात्रा बताने वाले एल्बुमिन अनुपात के बराबर नहीं होती। पूछें कि डॉक्टर ने जो दोनों हिस्से माँगे थे, वे पूरे हुए हैं या नहीं।
एक नतीजा बदला हो तो क्या समझें?
छानने का अनुमान लगातार 60 से कम होना या पेशाब में एल्बुमिन जैसे नुकसान के संकेत बने रहना लंबे समय की किडनी बीमारी की पहचान में काम आता है। इसे दीर्घकालिक कहने के लिए आमतौर पर असामान्यता कम से कम तीन महीने बनी होने का आधार चाहिए। एक नतीजा वह अवधि साबित नहीं करता।
60 से 89 के बीच अनुमान हो, लेकिन नुकसान का दूसरा संकेत न हो, तो केवल इसी से दीर्घकालिक बीमारी तय नहीं होती। दूसरी ओर छानने का काम ठीक दिखने पर भी पेशाब में एल्बुमिन बढ़ सकता है। इसलिए दोनों रिपोर्टों को साथ पढ़ना जरूरी है।
एल्बुमिन अनुपात की इकाइयाँ अलग हो सकती हैं। 30 मिलीग्राम प्रति ग्राम या उससे अधिक, अथवा दूसरी इकाई में लगभग 3 मिलीग्राम प्रति मिलीमोल या उससे अधिक नतीजा डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अलग इकाइयों के अंक एक जैसे समझकर तुलना न करें। जरूरत के अनुसार पुष्टि की जाँच होती है।
बुखार, पेशाब का संक्रमण, हाल की कड़ी कसरत, नमूने में माहवारी का खून या शुगर तथा रक्तचाप में बदलाव एल्बुमिन पर असर डाल सकते हैं। डॉक्टर इन्हें देखकर नमूना दोबारा देने का समय तय करते हैं। नया बदला नतीजा अभी दिखाएँ; तीन महीने की परिभाषा सलाह लेने में देरी करने का निर्देश नहीं है।
नमूना देने से पहले क्या पूछें?
जो जाँच लिखी गई है, उसी की तैयारी प्रयोगशाला से पूछें। एल्बुमिन अनुपात अक्सर एक पेशाब के नमूने से मापा जाता है। कई स्थितियों में सुबह का पहला नमूना उपयोगी होता है। इसका मतलब अपने आप पूरे दिन का पेशाब इकट्ठा करना नहीं है। संक्रमण, माहवारी या हाल की बहुत कठिन कसरत की जानकारी दें।
केवल खून के क्रिएटिनिन और पेशाब के एल्बुमिन अनुपात के लिए हर बार खाली पेट रहना जरूरी नहीं होता। साथ की दूसरी जाँचों की तैयारी अलग हो सकती है। केंद्र के निर्देश मानें और अपना उपचार खुद न बदलें। रिपोर्ट ठीक करने के लिए जबरन बहुत पानी पीना या किडनी साफ करने का नुस्खा अपनाना उचित नहीं है।
आगे कौन सी जाँच हो सकती है?
डॉक्टर पुरानी रिपोर्ट से तुलना करते हैं, रक्तचाप और बाकी स्वास्थ्य जानकारी देखते हैं, फिर दोबारा खून या पेशाब की जरूरत तय करते हैं। मांसपेशियों की मात्रा जैसी वजह से अनुमान स्पष्ट न हो तो कभी एक और छानने का संकेतक उपयोगी हो सकता है। हर हल्के बदलाव पर स्कैन जोड़ना जरूरी नहीं है।
पुष्टि होने पर कारण और आगे के जोखिम के अनुसार सामान्य चिकित्सक, किडनी विशेषज्ञ या दोनों की देखभाल चुनी जाती है। एक अंक से डायलिसिस की जरूरत तय नहीं होती। बिना लक्षण यूरिक एसिड बढ़ना दूसरी रिपोर्ट का विषय है; वह इन जाँचों की जगह नहीं लेता।
कितनी जल्दी रिपोर्ट दिखाएँ?
पुराने स्थिर नतीजे की सामान्य समीक्षा तय योजना के अनुसार कराएँ। नया असामान्य नतीजा, पिछली क्षमता से साफ गिरावट या प्रयोगशाला की जल्दी दिखाने की सलाह हो तो जल्द डॉक्टर से बात करें।
पेशाब बहुत कम होने के साथ ज्यादा सूजन या साँस की परेशानी हो तो तत्काल चिकित्सकीय जाँच जरूरी है। बहुत अस्वस्थ व्यक्ति में सामान्य दोबारा जाँच की तारीख का इंतजार न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या 70 का अनुमान मतलब किडनी 70 प्रतिशत काम कर रही है?
नहीं। यह तय इकाइयों में छानने की क्षमता का अनुमान है, प्रतिशत नहीं। डॉक्टर उम्र, पेशाब के नतीजे और पिछली रिपोर्टों के साथ इसका अर्थ समझाते हैं।
सामान्य क्रिएटिनिन के साथ भी किडनी की परेशानी हो सकती है?
हाँ। अकेले क्रिएटिनिन से पूरी जानकारी नहीं मिलती। पेशाब का एल्बुमिन या दूसरे संकेत परेशानी बता सकते हैं, भले खून में छानने का काम ठीक लगे।
एक बार एल्बुमिन अनुपात बढ़ना लंबी बीमारी साबित करता है?
नहीं। अस्थायी कारण और असामान्यता की अवधि देखनी होती है। डॉक्टर तय करते हैं कि पुष्टि की जाँच जरूरी है या नहीं और दोबारा नमूना कब देना है।
क्या बदली रिपोर्ट दिखाने के लिए तीन महीने रुकना चाहिए?
नहीं। नई असामान्य रिपोर्ट जल्दी दिखाएँ। तीन महीने का अर्थ दीर्घकालिक बीमारी की अवधि से है, डॉक्टर से सलाह लेने के इंतजार से नहीं।
क्या हर व्यक्ति को स्कैन या पूरे दिन का पेशाब देना पड़ता है?
नहीं। कई बार एक नमूने का अनुपात उपयोगी होता है। स्कैन किसी खास सवाल के लिए चुना जाता है। अतिरिक्त जाँच से देखभाल में क्या बदलाव होगा, यह पूछें।
नई और पुरानी दोनों रिपोर्टें साथ लाएँ। शुगर और रक्तचाप संबंधी जोखिम के लिए मेटाबोलिक क्लिनिक में सलाह या सही विशेषज्ञ चुनने के लिए मुलाकात का अनुरोध कर सकते हैं।
