Speech Delay in Hindi: बच्चा देर से बोले तो क्या करें?

“बच्चा सब समझता है, पर बोलता नहीं”—माता-पिता की यह चिंता आम है। कुछ बच्चे थोड़ा देर से बोलना शुरू करते हैं। कुछ बच्चों में सुनने की समस्या, भाषा के विकास में देरी, ऑटिज्म या…

Speech Delay in Hindi: बच्चा देर से बोले तो क्या करें?
सीधे शब्दों में

“बच्चा सब समझता है, पर बोलता नहीं”—माता-पिता की यह चिंता आम है। कुछ बच्चे थोड़ा देर से बोलना शुरू करते हैं। कुछ बच्चों में सुनने की समस्या, भाषा के विकास में देरी, ऑटिज्म या…

“बच्चा सब समझता है, पर बोलता नहीं”—माता-पिता की यह चिंता आम है। कुछ बच्चे थोड़ा देर से बोलना शुरू करते हैं। कुछ बच्चों में सुनने की समस्या, भाषा के विकास में देरी, ऑटिज्म या विकास से जुड़ी दूसरी परेशानी हो सकती है। पहले से यह तय करना कठिन है कि कौन बच्चा अपने आप आगे बढ़ेगा। इसलिए केवल “लड़के देर से बोलते हैं, इंतजार करें” कहना पर्याप्त नहीं है।

सीधे शब्दों में

बोलने में देरी हो तो यह भी देखना चाहिए कि बच्चा कितना समझता है, इशारे करता है या नहीं, आँखों में देखता है या नहीं, कैसे खेलता है और उसकी सुनने की क्षमता कैसी है। शुरुआती जाँच का अर्थ बच्चे पर ठप्पा लगाना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता देना है। घर में बातचीत जरूरी है, पर लगातार देरी में विशेषज्ञ की जाँच भी जरूरी होती है।

उम्र के अनुसार बोलने के पड़ाव कैसे देखें?

विकास के पड़ाव कोई परीक्षा नहीं हैं; वे बताते हैं कि अधिकतर बच्चे किस उम्र में कौन-सी क्षमता दिखाते हैं। करीब 18 महीने में कुछ शब्द कहने की कोशिश और जरूरत की चीज को उंगली से दिखाना अपेक्षित होता है। दो साल में दो शब्द जोड़कर छोटा वाक्य बोलना महत्वपूर्ण है। तीन साल में बच्चा छोटी बातचीत कर सकता है और घरवालों को उसकी अधिकतर बातें समझ आने लगती हैं। दो या अधिक भाषाएँ सुनने वाले बच्चे के सभी भाषाओं के शब्दों को मिलाकर देखें।

किन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है?

  • पहले आए शब्द या सामाजिक क्षमताएँ किसी भी उम्र में कम होना
  • आवाज पर प्रतिक्रिया कम या सुनने की क्षमता चिंता
  • उंगली से दिखाना या हाथ से बाय-बाय करना बहुत कम
  • आँखों में देखना या दूसरों से मेलजोल कम होना
  • दो साल में अर्थपूर्ण दो शब्दों वाले वाक्य न होना
  • साधारण निर्देश न समझना
  • खाने, चलने या विकास के दूसरे क्षेत्रों में भी देरी

पहले से आई क्षमता कम हो जाए तो बच्चों के डॉक्टर से जल्द जाँच कराएँ।

सुनने की जाँच क्यों जरूरी है?

कुछ आवाजों पर प्रतिक्रिया देने के बावजूद हल्की सुनने की कमी या केवल एक कान में समस्या हो सकती है। बार-बार कान का संक्रमण भी सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए बोलने में देरी की जाँच में सुनने की औपचारिक जाँच महत्वपूर्ण है। टीवी की आवाज सुन लेना सामान्य सुनने की क्षमता का प्रमाण नहीं है।

क्या बोलने में देरी का अर्थ ऑटिज्म है?

सिर्फ बोलने में देरी से ऑटिज्म की पहचान नहीं होती। बच्चा दूसरों से कैसे जुड़ता है, आँखों में देखता है या नहीं, इशारे, बार-बार दोहराया जाने वाला व्यवहार, खेल और संवेदनशीलता जैसे पहलुओं की जाँच की जाती है। सुनने की कमी, भाषा के विकास की समस्या, मुँह की मांसपेशियों की दिक्कत और पूरे विकास में देरी भी कारण हो सकते हैं।

बच्चे की जाँच में क्या देखा जाता है?

बच्चों के डॉक्टर जन्म और पुराने स्वास्थ्य की जानकारी लेकर विकास के पड़ाव और शरीर की जाँच करते हैं। बोलने और भाषा के विशेषज्ञ देखते हैं कि बच्चा कितना समझता है, कैसे अपनी बात बताता है, कैसे इशारे और खेल करता है तथा कौन-सी ध्वनियाँ बोल पाता है। सुनने की जाँच की जा सकती है। जरूरत होने पर विकास विशेषज्ञ या कान–नाक–गला डॉक्टर की सलाह ली जाती है।

घर पर क्या करें?

बच्चा जिस वस्तु की ओर देखे उसका नाम बोलें। छोटे और स्पष्ट वाक्य इस्तेमाल करें। वह “कार” कहे तो “लाल कार जा रही है” कहकर शब्द बढ़ाएँ। चित्रों वाली किताबें देखें, हावभाव वाले गीत और बारी-बारी से खेले जाने वाले खेल करें। बार-बार सवाल पूछकर परीक्षा न लें; उसकी बात पर प्रतिक्रिया देकर जवाब का समय दें। पीछे चलता टीवी बंद करें और आमने-सामने खेल बढ़ाएँ। मोबाइल या टीवी को बोलना सिखाने का मुख्य साधन न बनाएं।

क्या दो भाषाओं से बोलने में देरी होती है?

दो भाषाएँ सुनने से अपने आप भाषा की समस्या नहीं होती। बच्चे के शब्द अलग-अलग भाषाओं में बंटे हो सकते हैं। परिवार जिन भाषाओं में सहज है, उनमें बात जारी रखें। जाँच के समय सभी भाषाओं में बच्चे की क्षमता बताएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या लड़के सच में देर से बोलते हैं?

बच्चों के विकास में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन जरूरी पड़ाव न दिखें तो चिंता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बोलने की थेरेपी कब शुरू करें?

देरी जारी हो या खतरे का संकेत मिले तो सहायता जल्दी शुरू की जा सकती है। तीन साल तक इंतजार करना हर बच्चे के लिए सही नियम नहीं है।

क्या जीभ के नीचे का तंग बंधन कारण हो सकता है?

यह कुछ ध्वनियों के उच्चारण को प्रभावित कर सकता है, लेकिन पूरी भाषा में देरी का सामान्य कारण नहीं है। किसी प्रक्रिया से पहले सही जाँच जरूरी है।

क्या मोबाइल से बोलने में देरी होती है?

बहुत अधिक मोबाइल या टीवी देखने से आमने-सामने बातचीत और खेल कम हो सकता है, लेकिन इसे अकेला कारण नहीं माना जा सकता।

बच्चा समझता है तो क्या इंतजार कर सकते हैं?

बच्चे का बात समझना अच्छा संकेत है। फिर भी बोलने में देरी जारी रहे तो जाँच और सुनने की क्षमता की परीक्षा पर विचार करें।

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