Growing Pains in Hindi: बच्चों के पैरों में रात को दर्द की जाँच कब?

शाम या रात में दोनों पैरों का दर्द कुछ बच्चों में आता-जाता है। चलते समय दर्द, लंगड़ाना या जोड़ में सूजन हो तो कारण की अलग जाँच जरूरी है।

बच्चा माता को रात के पैर दर्द के बारे में बताता हुआ
सीधे शब्दों में

शाम या रात में दोनों पैरों का दर्द कुछ बच्चों में आता-जाता है। चलते समय दर्द, लंगड़ाना या जोड़ में सूजन हो तो कारण की अलग जाँच जरूरी है।

बच्चा दिन भर सामान्य खेलता है, लेकिन सोने के समय कहता है कि दोनों पैर दुख रहे हैं। सुबह फिर आराम से चलता है। कुछ दिन बाद यही बात दोबारा हो तो माता-पिता सोच सकते हैं कि क्या यह बढ़ती उम्र की तकलीफ है या जाँच करानी चाहिए।

ऐसे बार-बार आने वाले कुछ दर्द को आम भाषा में ग्रोइंग पेन कहा जाता है। इस नाम का मतलब यह नहीं कि लंबाई बढ़ने से हड्डियाँ दर्द कर रही हैं। खासकर नई या बदलती तकलीफ में डॉक्टर पहले यह देखते हैं कि दर्द का क्रम और शारीरिक जाँच इस परिचित स्थिति से मिलते हैं या नहीं।

सीधे शब्दों में

सामान्य क्रम में दर्द आता-जाता है, अक्सर दोनों पैरों में होता है, शाम या रात को शुरू होता है और सुबह तक चला जाता है। जाँघों, पिंडलियों या घुटनों के पीछे की मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। जोड़ सूजा होना इसका सामान्य हिस्सा नहीं है। यह अक्सर लगभग तीन से बारह साल के बच्चों में बताया जाता है, लेकिन केवल उम्र से पहचान नहीं होती।

लंगड़ाना, सुबह भी दर्द रहना, बार-बार एक ही जगह दर्द होना या बच्चे का बीमार लगना इस नाम से नहीं टालना चाहिए। इन बातों में किसी दूसरे कारण की जाँच जरूरी होती है।

कौन सी बातें लिखकर रखें?

बच्चे से कहें कि उँगली से बताए कि दर्द कहाँ है। कौन सा पैर, कितनी देर और किस समय दुखा, क्या जगह बदलती है, तथा अगली सुबह चाल कैसी है, लिखें। चोट, बुखार, सूजन, भूख घटना या पहले जैसी ऊर्जा न रहना भी बताएँ।

कुछ बच्चों को ज्यादा सक्रिय दिन के बाद तकलीफ होती है। फिर भी हर बच्चे में यही पक्का कारण नहीं माना जा सकता। बच्चे को यह न कहें कि खेलने या बड़ा होने से उसके पैर खराब हो रहे हैं। बीच में ठीक दिखने के कारण उसकी शिकायत को अनसुना भी न करें।

परिचित क्रम से मिलने वाली बात अलग जाँच की जरूरत बताने वाली बात
दोनों पैरों में बीच-बीच में दर्द एक पैर या एक तय जगह पर बार-बार दर्द
शाम या रात की तकलीफ, सुबह तक ठीक सुबह अकड़न या चलने के समय दर्द
बीच के समय सामान्य चाल और खेल लंगड़ाना या पैर पर वजन रखने से बचना
जोड़ में सूजन नहीं और बच्चा सामान्य सूजन, बुखार, लगातार थकान या वजन घटना

यह तुलना डॉक्टर को सही जानकारी देने में मदद करती है। इससे घर में बीमारी तय नहीं की जा सकती। सलाह लेने के लिए बच्चे में सारे चेतावनी संकेत होना भी जरूरी नहीं है।

नाम में बढ़ती उम्र है, फिर कारण क्या है?

इस दर्द के ठीक-ठीक कारण का पता नहीं है। सामान्य हड्डी बढ़ने को दर्द का सिद्ध कारण मानना सही नहीं है। इसी तरह पैर दुखने से किसी पोषण की कमी की पुष्टि नहीं होती। हर बच्चे को कमी ढूँढने वाली सारी खून की जाँच जरूरी नहीं होती।

चोट, जोड़ की सूजन, पैर की बनावट की कुछ समस्याएँ या पैरों को बार-बार हिलाने की बेचैनी जैसी दूसरी स्थितियाँ भी तकलीफ दे सकती हैं। कौन सी संभावना देखनी है, यह बातचीत और जाँच से तय होता है। बच्चों के सपाट पैर वाले लेख में बिना दर्द के लचीले पैर और दर्द या अकड़न वाले पैर का फर्क समझाया गया है।

डॉक्टर क्या देखते हैं?

डॉक्टर बच्चे की चाल देख सकते हैं और कूल्हे, घुटने, टखने तथा पैर की जाँच कर सकते हैं। किसी तय जगह को छूने पर दर्द, सूजन या हरकत कम होने पर ध्यान दिया जाता है। बच्चे की बढ़त और पूरी सेहत की जानकारी भी जरूरी है।

नींद बार-बार टूट रही हो, स्कूल जाना कम हो रहा हो या बच्चा खेलने से बचने लगा हो तो बताएँ। मुलाकात के समय दर्द न हो, तब भी दिखाना उपयोगी है। घर में लिखी गई डायरी से डॉक्टर को बीच के दिनों का क्रम समझने में मदद मिल सकती है।

खून की जाँच या एक्स-रे कब जरूरी है?

हर बच्चे को ये जाँचें नहीं चाहिए। लक्षण परिचित क्रम जैसे हों और शारीरिक जाँच सामान्य हो तो परीक्षण से अतिरिक्त जानकारी न मिले। अलग लक्षण, किसी खास कारण का संदेह या तकलीफ में बदलाव हो तो डॉक्टर चुनिंदा जाँच करते हैं।

हर रात के दर्द का एक्स-रे करवाना जरूरी नहीं है। साथ ही एक्स-रे सामान्य होने के बाद भी तकलीफ बढ़े या बदले तो दोबारा दिखाएँ। पूछें कि प्रस्तावित जाँच किस सवाल का जवाब देगी और नतीजे से आगे की देखभाल कैसे बदलेगी।

जाँच सामान्य आने पर आगे क्या करें?

डॉक्टर परिचित, नुकसान न करने वाला क्रम मानें तो योजना में सही जानकारी, बच्चे के अनुसार आराम देने की चिकित्सकीय सलाह और दोबारा कब दिखाना है, यह शामिल होता है। इस लेख के आधार पर कोई नुस्खा या दूसरे बच्चे की पर्ची इस्तेमाल न करें। केवल ऑनलाइन दावे पर किसी कमी का उपचार शुरू न करें।

बच्चे की बात को गंभीरता से सुनें। लगातार तकलीफ रहे तो अगली समीक्षा का समय तय करें। गतिविधि में अस्थायी बदलाव की जरूरत है या नहीं, डॉक्टर से पूछें। केवल इस परिचित दर्द के कारण हमेशा के लिए खेल रोकना जरूरी नहीं होता। दूसरी विकास संबंधी चिंता के लिए बच्चे के विकास के पड़ाव की जाँच अलग विषय है।

कब जल्दी सलाह लें?

बार-बार दर्द हो और पहले जाँच न हुई हो, नींद बहुत बिगड़ रही हो या पहचान पर संदेह हो तो सामान्य बाल रोग मुलाकात लें। एक तरफ दर्द, दिन में लगातार तकलीफ, सुबह अकड़न, लंगड़ाना, सूजन या बिना वजह वजन घटना हो तो जल्दी दिखाएँ।

बच्चा पैर पर वजन ही न रख पाए, खासकर बुखार या बहुत दर्द वाले सूजे जोड़ के साथ, तो तत्काल चिकित्सकीय जाँच कराएँ। इसे ग्रोइंग पेन मानकर सामान्य तारीख का इंतजार न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या रात का पैर दर्द लंबाई बढ़ने का संकेत है?

नहीं। यह नाम पुराना है; इससे हड्डी बढ़ने को दर्द का कारण नहीं मान सकते। डॉक्टर दर्द का क्रम और शारीरिक जाँच देखकर समझते हैं।

क्या ऐसे दर्द से बच्चा नींद से जाग सकता है?

हाँ, नींद टूट सकती है। लेकिन दर्द लगातार रहे, बढ़े, एक जगह टिके या दूसरे लक्षण जुड़ें तो फिर से जाँच जरूरी है।

क्या ग्रोइंग पेन में लंगड़ाना सामान्य है?

नहीं। सामान्य परिचित क्रम में लंगड़ाना अपेक्षित नहीं है। इसे उम्र का असर मानने के बजाय डॉक्टर से कारण की जाँच कराएँ।

क्या हर बच्चे की पोषण की कमी वाली जाँच जरूरी है?

नहीं। बच्चे की बाकी जानकारी और शारीरिक जाँच के अनुसार परीक्षण चुने जाते हैं। पैर दर्द अकेले किसी कमी या उसके उपचार की जरूरत साबित नहीं करता।

पहले जाँच ठीक थी, अब दर्द बदल गया तो क्या करें?

दोबारा दिखाएँ। नई सूजन, चाल बदलना, दिन का दर्द या बीमार लगना पहले की सामान्य जाँच के बाद भी नई समीक्षा की वजह है।

दर्द की डायरी के साथ बाल रोग विभाग में सलाह लें या डॉक्टर से मिलने का समय लें। लक्ष्य है बच्चे की असल तकलीफ को समझना और अगली समीक्षा की स्पष्ट योजना बनाना।

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