बवासीर जैसे लक्षणों की वजह समझने के लिए बातचीत और शारीरिक जाँच जरूरी हो सकती है। एनोस्कोपी अंदर की बवासीर देखने में मदद करती है।
मलत्याग के समय खून दिखने या गांठ बाहर आने पर जाँच कराने का विचार आता है, लेकिन संकोच भी हो सकता है। डॉक्टर क्या करेंगे, दर्द होगा या नहीं, और क्या उसी दिन ऑपरेशन का फैसला लेना पड़ेगा—ये सवाल स्वाभाविक हैं।
मुलाकात का पहला उद्देश्य लक्षणों की वजह समझना है। जाँच के लिए आने का मतलब किसी इलाज की अनुमति देना नहीं है।
सीधे शब्दों में
डॉक्टर पहले परेशानी का विवरण लेते हैं। आपकी सहमति से बाहर का हिस्सा देखना, दस्ताने वाली उंगली से धीरे जाँचना और जरूरत पड़ने पर छोटी नली से अंदर देखना अलग-अलग जानकारी देते हैं। इस छोटी नली से की जाने वाली जाँच को एनोस्कोपी कहते हैं। हर व्यक्ति को पहली मुलाकात में सभी चरणों की जरूरत नहीं होती।
कौन सी बातें पहले बतानी चाहिए?
खून कब आता है, दर्द या खुजली है या नहीं, गांठ कब बाहर आती है और अपने आप अंदर जाती है या नहीं—यह बताएँ। कब्ज, बार-बार पतला मल, पहले हुए ऑपरेशन और मल रोकने में कठिनाई का भी उल्लेख करें। पुराने पर्चे, जाँच की रिपोर्ट और चल रहे इलाज की सूची साथ रखें।
केवल खून की मात्रा से बवासीर की श्रेणी तय नहीं होती। बवासीर की अलग-अलग श्रेणियों में मुख्य अंतर गांठ के बाहर आने से जुड़ा होता है।
संकोच या दर्द की चिंता हो तो क्या करें?
जाँच शुरू होने से पहले तरीका समझाने को कहें। निजी स्थान, ढकने का कपड़ा और जाँच के समय सहायक स्वास्थ्यकर्मी की मौजूदगी के बारे में पूछ सकते हैं। पहले कोई जाँच दर्दनाक रही हो तो बताएँ। रुकने या कुछ देर विराम लेने का संकेत तय कर लें।
असहनीय दर्द सहकर जाँच जारी रखना जरूरी नहीं है। अधिक संवेदनशीलता होने पर डॉक्टर तरीका बदल सकते हैं या जाँच बाद के लिए तय कर सकते हैं। इससे अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि ऑपरेशन जरूरी है।
एनोस्कोपी क्या दिखाती है?
छोटा उपकरण मलद्वार की नली और मलाशय के सबसे निचले हिस्से को देखने में मदद करता है। अंदर की बवासीर बाहर देखकर हमेशा पता नहीं चलती। जाँच में दबाव या असुविधा हो सकती है; इसे हर किसी के लिए दर्दरहित कहना सही नहीं होगा।
यह कोलोनोस्कोपी से अलग है, जिसमें बड़ी आंत का अधिक हिस्सा देखा जाता है। तैयारी भी अलग हो सकती है। अपने आप उपवास न करें, पेट साफ करने का उत्पाद न लें और चल रहा इलाज बंद न करें। अपनी मुलाकात के निर्देश पहले पूछ लें।
जाँच से इलाज का फैसला कैसे बदलता है?
अंदर की बवासीर, बाहर की सूजन, गांठ का बाहर आना और दूसरी तकलीफें देखकर विकल्प तय होते हैं। कुछ मामलों में बिना ऑपरेशन के देखभाल, कुछ में क्लिनिक में प्रक्रिया और कुछ में सर्जरी पर चर्चा होती है। उपकरण का नाम अकेले चुनाव नहीं कर सकता।
लेजर और सामान्य ऑपरेशन की तुलना वाला हमारा लेख विकल्प समझाता है। एनोस्कोपी कराने का अर्थ इनमें से किसी प्रक्रिया की सहमति देना नहीं है। डॉक्टर से पूछें कि निष्कर्ष आपके सभी लक्षणों को समझाता है या अतिरिक्त जाँच चाहिए।
दोबारा संपर्क कब करें?
लक्षण जारी रहें या बदलें तो तय समय से पहले सलाह लें। बहुत खून आने के साथ चक्कर या बेहोशी जैसा लगना, या तेजी से बढ़ता तेज दर्द हो तो तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन कराएँ। सामान्य मुलाकात का इंतजार न करें।
आम सवाल
क्या बाहर देखकर अंदर की बवासीर पता चल जाती है?
हमेशा नहीं। लक्षणों के अनुसार अंदर की जाँच जरूरी हो सकती है। डॉक्टर इसका कारण समझाएँगे।
क्या हर मरीज की पहली बार एनोस्कोपी होती है?
नहीं। जरूरत, शारीरिक जाँच के निष्कर्ष और आपकी सुविधा के आधार पर फैसला होता है।
क्या उसी दिन इलाज चुनना पड़ेगा?
नहीं। विकल्प, लाभ, सीमाएँ और जोखिम समझकर फैसला लेने का समय माँग सकते हैं।
क्या एनोस्कोपी पूरी बड़ी आंत की जाँच है?
नहीं। यह निचले छोटे हिस्से को देखती है। बड़ी आंत की दूसरी जाँच अलग कारण से सुझाई जा सकती है।
मुलाकात में क्या साथ लाएँ?
पुरानी रिपोर्ट, चल रहे इलाज की सूची और लक्षणों का छोटा विवरण लाएँ। तैयारी के व्यक्तिगत निर्देश पहले स्पष्ट करें।
परामर्श का समय लें और अपनी परेशानी के लिए उपयुक्त जाँच पर बात करें।
