एक व्यवहार से ऑटिज्म का निदान नहीं होता। बच्चे की बातचीत, खेल और विकास का पूरा ढंग देखकर जाँच तथा जरूरत के अनुसार सहायता तय की जाती है।
बच्चा नाम पुकारने पर कम जवाब देता है, पसंद का खिलौना दिखाने के लिए आपके पास नहीं लाता या रोज के छोटे बदलाव से बहुत परेशान हो जाता है? कभी परिवार को बोलने में देरी भी दिखाई देती है। इन बातों पर बाल रोग विशेषज्ञ से शांत ढंग से चर्चा करना उचित है। केवल एक व्यवहार से ऑटिज्म तय नहीं होता।
ऑटिज्म विकास से जुड़ी स्थिति है, जिसमें दूसरे लोगों से संवाद, मेलजोल, रुचियों और आसपास की आवाजों या अनुभवों पर प्रतिक्रिया का ढंग अलग हो सकता है। बच्चों की क्षमताएँ और सहायता की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। जाँच का उद्देश्य बच्चे को समझना और उसकी रोज की जरूरतों में मदद करना है।
सीधे शब्दों में
बातचीत, खेल या व्यवहार के लगातार ढंग को लेकर चिंता हो तो विकास की जाँच माँगें। पहचान के लिए पूछे जाने वाले शुरुआती सवाल बताते हैं कि गहराई से जाँच उपयोगी हो सकती है। उनसे पक्का निदान नहीं होता। विशेषज्ञ बच्चे के विकास का इतिहास और व्यवहार देखकर निष्कर्ष निकालते हैं; एक रक्त जाँच या स्कैन से ऑटिज्म की पुष्टि नहीं होती।
कौन सी बातें बताना उपयोगी है?
केवल बोले गए शब्दों की संख्या न देखें। बच्चा इशारे कैसे करता है, पसंद की चीज में आपकी रुचि कैसे जोड़ता है, खेल में कैसी भागीदारी करता है और लोगों को किस तरह जवाब देता है, यह भी बताएँ। कुछ बच्चों में साझा रुचि दिखाना, आगे-पीछे बातचीत या नाम पर प्रतिक्रिया कम हो सकती है।
एक जैसी गतिविधि बार-बार करना, बदलाव में कठिनाई या आवाज और कपड़े की बनावट पर बहुत अलग प्रतिक्रिया भी चर्चा के विषय हो सकते हैं। इनमें से किसी एक बात से निदान नहीं किया जाता। सुनने की परेशानी, भाषा की देरी और दूसरे विकास संबंधी कारण भी देखे जाते हैं।
कुछ ऑटिस्टिक बच्चे खूब बोलते हैं और आँखों में भी देखते हैं। यह क्षमता होने से ऑटिज्म पूरी तरह नहीं नकारा जाता। बच्चे को बार-बार परीक्षा की तरह परखना या जबरन आँखों में देखने को कहना उचित नहीं। सामान्य खेल, भोजन या स्कूल के उदाहरण बताएँ और यह भी बताएँ कि बच्चा किन चीजों का आनंद लेता है।
क्या बोलने में देरी और ऑटिज्म एक ही हैं?
नहीं। भाषा या बोलने में देरी कई कारणों से हो सकती है। वह ऑटिज्म के साथ भी हो सकती है और उसके बिना भी। डॉक्टर समझने की क्षमता, इशारों, खेल, सुनने और पूरे विकास को साथ देखते हैं। बोलने में देरी की जानकारी से समझ सकते हैं कि केवल शब्द गिनना पर्याप्त क्यों नहीं है।
| प्रक्रिया | उद्देश्य | अकेले क्या नहीं बताती? |
|---|---|---|
| विकास पर नियमित नजर | क्षमताएँ और चिंताएँ समय के साथ देखना | सूची से पक्का निदान नहीं होता |
| तय सवालों से शुरुआती जाँच | गहरी जाँच की जरूरत पहचानना | निश्चित पुष्टि या पूरी तरह नकारना नहीं |
| विशेषज्ञ का मूल्यांकन | इतिहास, व्यवहार और उपयुक्त तरीकों को साथ देखना | भविष्य की हर क्षमता की भविष्यवाणी नहीं |
बच्चे के विकास की अवस्थाएँ संदर्भ देती हैं। बच्चा समय पर चलने लगा या कोई काम बहुत अच्छा करता है, इसलिए दूसरी चिंता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कब जाँच के लिए बात करनी चाहिए?
चिंता सामने आते ही बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें; अगले जन्मदिन या स्कूल शुरू होने तक प्रतीक्षा जरूरी नहीं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स अठारह और चौबीस महीने पर ऑटिज्म की पहचान के लिए विशेष जाँच सुझाती है। लेकिन किसी दूसरी उम्र में चिंता हो तो भी जाँच की जरूरत पर बात करनी चाहिए। अपने इलाके में उपलब्ध विकास जाँच और रेफरल का तरीका डॉक्टर से पूछें।
पहले बोले गए शब्द, मेलजोल या चलने-फिरने की सीखी क्षमता खोने पर जल्द बाल रोग विशेषज्ञ से जाँच कराएँ। साफ बताएँ कि बच्चा पहले क्या करता था और अब क्या नहीं कर रहा। क्षमता कम होने के दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए उसे बिना जाँच केवल ऑटिज्म न मानें।
विशेषज्ञ जाँच में क्या होता है?
शुरुआत में गर्भावस्था और जन्म, विकास, सुनने, स्वास्थ्य तथा परिवार की टिप्पणियों के बारे में पूछा जा सकता है। जरूरत पर विकास विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, संवाद विशेषज्ञ या रोजमर्रा की गतिविधियों में सहायता देने वाले चिकित्सक की टीम शामिल हो सकती है। हर बच्चे की जरूरत के अनुसार रास्ता अलग होता है।
विशेषज्ञ खेल और मेलजोल देख सकते हैं, परिवार से सवाल पूछ सकते हैं और संरचित तरीकों का उपयोग कर सकते हैं। जवाब देने या भाषा को लेकर संदेह हो तो सुनने की जाँच उपयोगी हो सकती है। अन्य चिकित्सा परीक्षण खास कारण के अनुसार चुने जाते हैं। कई रक्त जाँचों का पैकेज या सामान्य स्कैन ऑटिज्म का निदान नहीं करता।
कभी एक से अधिक मुलाकातों की जरूरत होती है। घर और स्कूल की जानकारी अलग हो तो उसे समझना भी महत्वपूर्ण है। पुरानी रिपोर्ट, सुनने की जाँच और स्कूल के छोटे उदाहरण साथ लाएँ। परिवार जिन भाषाओं में बात करता है, उनकी जानकारी दें। पूछें कि निष्कर्ष कौन समझाएगा और आगे किससे संपर्क करना है।
क्या निदान पूरा होने से पहले सहायता मिल सकती है?
हाँ। बातचीत, विकास या रोज के काम की पहचानी गई जरूरतों पर सहायता शुरू हो सकती है, जबकि निदान की प्रक्रिया जारी हो। लक्ष्य व्यावहारिक हों, बच्चे की खूबियों के अनुसार हों और परिवार को शामिल करें। जरूरत के अनुसार संवाद, भागीदारी और देखभाल करने वालों के मार्गदर्शन पर काम हो सकता है।
हर बच्चे को एक जैसा बनाने या ऑटिज्म पूरी तरह मिटाने की गारंटी स्वीकार न करें। पूछें कि लक्ष्य कैसे चुने गए, बच्चा सहज है या नहीं और प्रगति कैसे देखेंगे। सहायता सम्मान के साथ होनी चाहिए; केवल आँख मिलाने को सफलता का माप न बनाएँ।
बाल रोग विभाग में प्रारंभिक समीक्षा और उचित विशेषज्ञ तक पहुँचने की सलाह ली जा सकती है। परामर्श के बाद अगली मुलाकात और सहायता की स्पष्ट योजना लें, भले ही अंतिम निदान अभी तय न हुआ हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नाम पुकारने पर जवाब न देना क्या ऑटिज्म का प्रमाण है?
नहीं। सुनने, ध्यान, भाषा और विकास से जुड़े कई कारण प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। लगातार चिंता हो तो बच्चे के पूरे संवाद और विकास के संदर्भ में जाँच जरूरी है।
बोलने और आँख मिलाने वाला बच्चा भी ऑटिस्टिक हो सकता है?
हाँ। क्षमताएँ अलग-अलग होती हैं। बोलना या आँखों में देखना ऑटिज्म को पूरी तरह नहीं नकारता; विशेषज्ञ व्यवहार के पूरे ढंग और सहायता की जरूरत देखते हैं।
शुरुआती जाँच में संकेत मिले तो क्या निदान तय है?
नहीं। इसका अर्थ है कि आगे गहराई से जाँच उचित हो सकती है। निदान में विकास का इतिहास, विशेषज्ञ का अवलोकन और दूसरी संभावित वजहों पर विचार शामिल होता है।
क्या खून की जाँच या मस्तिष्क का स्कैन पुष्टि करता है?
कोई एक रक्त जाँच या स्कैन ऑटिज्म की पुष्टि नहीं करता। खास चिकित्सा सवाल के लिए परीक्षण चुने जा सकते हैं, लेकिन वे विकास के मूल्यांकन की जगह नहीं लेते।
क्या स्कूल शुरू होने तक प्रतीक्षा करनी चाहिए?
नहीं। चिंता होने पर बात करें और पहले सीखी क्षमता घटे तो जल्द जाँच कराएँ। पहचानी गई जरूरतों के लिए सहायता अंतिम निदान से पहले भी शुरू हो सकती है।
