योनि में उभार महसूस होने पर हर महिला को ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती। जाँच से समस्या का प्रकार और आपकी परेशानी के अनुसार देखभाल तय होती है।
लंबे समय तक खड़े रहने पर नीचे भारीपन महसूस होना या नहाते समय योनि के पास उभार दिखना असहज लग सकता है। कई महिलाएँ इस बारे में बात करने से झिझकती हैं। यह परेशानी डॉक्टर को बताना उपयोगी है; खुद देखकर यह तय करना मुश्किल है कि कौन सा अंग नीचे आया है।
बच्चेदानी को सहारा देने वाली मांसपेशियाँ और ऊतक कमजोर पड़ने पर वह योनि की ओर नीचे आ सकती है। इसे गर्भाशय या बच्चेदानी का प्रोलैप्स कहते हैं। कभी मूत्राशय या आँत की तरफ की योनि की दीवार भी उभरती है। एक साथ एक से अधिक हिस्से प्रभावित हो सकते हैं।
सीधे शब्दों में
प्रोलैप्स का मतलब अपने आप ऑपरेशन नहीं है। हल्की परेशानी में तय समय पर निगरानी, विशेषज्ञ की देखरेख में मांसपेशियों का प्रशिक्षण या योनि में लगाया जाने वाला सहारा देने का उपकरण मदद कर सकता है। इस उपकरण को पेसरी कहते हैं। उपचार का फैसला जाँच, रोजमर्रा की कठिनाई और आपकी प्राथमिकताओं को साथ रखकर होता है।
डॉक्टर को कौन सी बातें बतानी चाहिए?
उभार कब महसूस होता है, खड़े रहने के बाद कितना बढ़ता है और चलने या काम करने में क्या कठिनाई आती है, यह लिख लें। पेशाब रिसना, बार-बार पेशाब आना, मूत्राशय पूरा खाली न होने का एहसास या मल त्याग में कठिनाई भी बताएँ। संबंध बनाते समय असुविधा हो तो उसे भी खुलकर बताना ठीक है।
इन लक्षणों की दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। इसलिए पेशाब की हर तकलीफ को केवल बच्चेदानी खिसकने से न जोड़ें। प्रसव, बढ़ती उम्र, लंबे समय की खाँसी, बार-बार जोर लगना और शरीर के सहायक ऊतकों की बनावट इसमें योगदान दे सकते हैं। यह किसी महिला की गलती या व्यक्तिगत कमजोरी का प्रमाण नहीं है।
जाँच और अवस्था कैसे तय होती है?
डॉक्टर पुराने प्रसव, ऑपरेशन, दूसरी बीमारियों और आपकी परेशानी के बारे में पूछेंगे। आपकी सहमति से अंदरूनी जाँच की जा सकती है। इससे पता चलता है कि बच्चेदानी नीचे आई है, योनि की किसी दीवार का सहारा कमजोर हुआ है, या दोनों समस्याएँ हैं। जाँच से पहले उसका तरीका समझें और आवश्यकता हो तो किसी सहायक स्वास्थ्यकर्मी की मौजूदगी माँगें।
जाँच के समय स्थिति बदलने या थोड़ा जोर लगाने को कहा जा सकता है। असुविधा होने पर रुकने के लिए कह सकती हैं। प्रोलैप्स की अवस्था बताती है कि ऊतक योनि के द्वार के मुकाबले कितने नीचे आते हैं। केवल अवस्था का अंक यह नहीं बताता कि ऑपरेशन जरूरी है या नहीं।
| जाँच का हिस्सा | इससे क्या स्पष्ट होता है? |
|---|---|
| अंदरूनी शारीरिक जाँच | कौन से अंग या दीवारें प्रभावित हैं |
| जरूरत के अनुसार पेशाब की जाँच | संक्रमण की संभावना है या नहीं |
| मूत्राशय खाली होने की जाँच | पेशाब करने के बाद कितना बचता है |
| लक्षणों के अनुसार अन्य जाँच | किसी अलग समस्या की जाँच चाहिए या नहीं |
हर महिला को अल्ट्रासाउंड या कई जाँचों का पैकेज जरूरी नहीं होता। पहले से हुई जाँचें साथ लाएँ। स्त्री रोग विभाग में शुरुआती बातचीत से उचित जाँच तय की जा सकती है।
बिना ऑपरेशन के कौन से विकल्प हैं?
यदि परेशानी कम है तो डॉक्टर के साथ निगरानी का फैसला किया जा सकता है। इसमें यह भी तय होना चाहिए कि कौन सा बदलाव होने पर फिर मिलना है। प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट मांसपेशियों की स्थिति देखकर सही अभ्यास सिखा सकते हैं। इससे कुछ महिलाओं के लक्षण सुधरते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा नीचे आए अंग को पूरी तरह अपनी जगह लौटा देने की गारंटी नहीं होती।
पेसरी योनि के अंदर लगने वाला सहारा है। इसे सही आकार में फिट करना जरूरी है और कभी एक से अधिक बार फिटिंग करनी पड़ती है। यह केवल बहुत अधिक उम्र की महिलाओं का विकल्प नहीं है। आपकी सुविधा, भविष्य की गर्भावस्था की इच्छा और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार इसकी उपयोगिता पर चर्चा हो सकती है।
इसे साफ करने, निकालने और दोबारा जाँच कराने का स्पष्ट कार्यक्रम लें। अपनी ओर से उपकरण खरीदकर न लगाएँ। नए दर्द, खून, असामान्य स्राव या पेशाब की परेशानी पर अगली तय तारीख तक प्रतीक्षा न करें; देखभाल करने वाली टीम से संपर्क करें।
ऑपरेशन की चर्चा कब की जाती है?
परेशानी रोज के जीवन को प्रभावित करती रहे या उपयुक्त दूसरे विकल्प पर्याप्त मदद न करें तो ऑपरेशन पर बात हो सकती है। कुछ तरीकों में बच्चेदानी रखी जा सकती है। कुछ में उसे निकालने के साथ सहारा देने की मरम्मत की जाती है। हर प्रोलैप्स में बच्चेदानी निकालना अनिवार्य नहीं है।
अपने भविष्य के परिवार संबंधी विचार, संबंध बनाने में सुविधा, पेशाब और मल की समस्या तथा काम की जरूरतें बताएँ। पूछें कि किस हिस्से की मरम्मत होगी, अपने ऊतक इस्तेमाल होंगे या कोई प्रत्यारोपित सामग्री, और उसके क्या लाभ व जोखिम हैं। ठीक होने का समय अलग-अलग होता है। उपचार के बाद समस्या लौट सकती है; स्थायी परिणाम का वादा उचित नहीं है।
कब सामान्य मुलाकात और कब जल्दी जाँच?
स्थिर भारीपन या लगातार उभार के लिए परामर्श का समय लें। नया खून, खुले हिस्से पर घाव, बढ़ती पेशाब की परेशानी या नया स्राव हो तो जल्द डॉक्टर को दिखाएँ। पेशाब बिल्कुल न आना, तेज दर्द या बहुत अधिक रक्तस्राव होने पर तत्काल चिकित्सा जाँच चाहिए।
मेनोपॉज में होने वाले बदलाव भी हों तो अलग से बताएँ। हर नया लक्षण मेनोपॉज के कारण नहीं होता। डॉक्टर की जानकारी देखकर परामर्श का समय लें और अपनी मुख्य परेशानी की छोटी सूची साथ रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या योनि में हर उभार बच्चेदानी ही होता है?
नहीं। मूत्राशय या आँत की तरफ की योनि की दीवार भी उभर सकती है। एक से अधिक हिस्से प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए जाँच से सही प्रकार पता करना जरूरी है।
क्या ज्यादा अवस्था का मतलब जरूरी ऑपरेशन है?
नहीं। लक्षण, पेशाब और मल की कार्यक्षमता, ऊतक की स्थिति, स्वास्थ्य और आपकी पसंद भी देखी जाती है। कुछ महिलाओं में अधिक प्रोलैप्स होने पर भी पेसरी उपयोगी हो सकती है।
क्या अभ्यास से हर प्रोलैप्स पूरी तरह ठीक हो जाता है?
नहीं। विशेषज्ञ की देखरेख में प्रशिक्षण से उपयुक्त मामलों में परेशानी कम हो सकती है। बहुत अधिक खिसकाव को पूरी तरह उलट देने का दावा सही नहीं है।
क्या पेसरी लगने के बाद जाँच बंद कर सकते हैं?
नहीं। उसकी सफाई, निकालने और जाँच का तय कार्यक्रम जरूरी है। खून, दर्द, स्राव या पेशाब में कठिनाई हो तो निर्धारित मुलाकात से पहले भी डॉक्टर को बताएँ।
क्या बच्चेदानी निकालना ही एकमात्र इलाज है?
नहीं। कुछ स्थितियों में बच्चेदानी को रखकर सहारा देने की मरम्मत संभव होती है। कौन सा तरीका उचित है, यह जाँच और आपकी प्राथमिकताओं के अनुसार सर्जन समझाएँगे।
