गर्भाशय की अंदरूनी जगह में उभरी चुनिंदा गांठें हिस्टेरोस्कोपी से हटाई जा सकती हैं। उपयुक्त तरीका केवल गांठ के आकार से तय नहीं होता।
माहवारी में अधिक खून आने की जाँच में फाइब्रॉएड मिला है। डॉक्टर ने कहा कि इसे गर्भाशय के मुँह से निकाला जा सकता है। तब सवाल होता है कि क्या हर गांठ के लिए पेट पर चीरा लगाए बिना यही तरीका संभव है।
इस लेख का विषय अधिक रक्तस्राव से जुड़ी चुनिंदा गांठों का इलाज है। गर्भधारण या प्रजनन उपचार के फैसलों के लिए अलग मूल्यांकन चाहिए।
सीधे शब्दों में
हिस्टेरोस्कोपी में पतला कैमरा योनि और गर्भाशय के मुँह से अंदर पहुँचाया जाता है। उपयुक्त उपकरणों से चुनिंदा गांठ हटाने को हिस्टेरोस्कोपिक मायोमेक्टॉमी कहते हैं। यह मुख्यतः अंदर की खोखली जगह में उभरे फाइब्रॉएड के लिए उपयोगी होती है। आकार के साथ स्थान और मांसपेशी में उसकी गहराई बहुत मायने रखती है।
कौन सी गांठ तक इस रास्ते पहुँचा जा सकता है?
अंदरूनी परत के नीचे से गुहा की ओर उभरी गांठ को सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड कहते हैं। कोई गांठ अधिकतर अंदर होती है, तो किसी का बड़ा हिस्सा गर्भाशय की मांसपेशी में होता है। ज्यादा गहराई वाला हिस्सा निकालना कठिन हो सकता है।
बाहर की सतह की ओर बढ़ने वाली गांठ का रास्ता सामान्यतः अलग होता है। केवल छोटे आकार का होना इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त नहीं है। फाइब्रॉएड की रिपोर्ट पर अगला कदम समझते समय लक्षण और स्थान साथ देखे जाते हैं।
ऑपरेशन से पहले क्या देखा जाता है?
डॉक्टर रक्तस्राव, खून की कमी, पिछली प्रक्रियाएँ और अल्ट्रासाउंड की तस्वीरें देखते हैं। कौन सी गांठ परेशानी में योगदान दे रही है, उसका कितना हिस्सा अंदर है और आसपास कितनी मांसपेशी है—इन सवालों से योजना बनती है।
जरूरत के अनुसार अतिरिक्त तस्वीरें या अंदर देखने की जाँच सुझाई जा सकती है। हर मरीज को MRI नहीं चाहिए। पुराने पर्चे और रिपोर्ट साथ लाएँ। अंदर दिखने वाला पॉलिप और फाइब्रॉएड अलग चीजें हैं; उनकी पहचान स्पष्ट होना जरूरी है।
क्या देखने और हटाने की प्रक्रिया एक ही है?
नहीं। जाँच और इलाज वाली हिस्टेरोस्कोपी के उद्देश्य अलग होते हैं। एक ही मुलाकात में इलाज होगा या नहीं, यह निष्कर्ष, सुविधा, आपकी सहमति और दर्द नियंत्रण की योजना पर निर्भर करता है।
बेहोशी या दर्द कम करने के विकल्प पहले समझें। गर्भ ठहरने की संभावना या नई बीमारी हो तो टीम को बताएँ। अपनी प्रक्रिया के लिखित निर्देश मानें; अपने आप उपवास की अवधि न चुनें और चल रहा इलाज बंद न करें।
दोबारा प्रक्रिया की जरूरत क्यों पड़ सकती है?
गहरी या बड़ी गांठ, कई गांठें, या साफ न दिखने पर एक बार में पूरा निकालना उचित नहीं हो सकता। अंदर देखने के लिए इस्तेमाल तरल की मात्रा की भी निगरानी होती है। सुरक्षा के लिए प्रक्रिया रोककर बाद में अगला चरण तय किया जा सकता है।
इसका अर्थ हमेशा असफल ऑपरेशन नहीं है। पूछें कि कितना हिस्सा निकला, बाकी का मूल्यांकन कैसे होगा और दूसरी प्रक्रिया कब उपयोगी होगी। हर व्यक्ति पर लागू होने वाला एक आकार या एक समयसीमा नहीं है।
सुधार और सीमाएँ कैसे समझें?
गांठ हटाने से रक्तस्राव घट सकता है, लेकिन दूसरी वजह से परेशानी बनी रह सकती है। आगे नई गांठें भी बन सकती हैं। खून आना, संक्रमण, गर्भाशय की दीवार को चोट, तरल से जुड़ी समस्या और अंदर चिपकाव जैसे जोखिम व्यक्तिगत रूप से समझें।
काम, वाहन चलाने और गतिविधियों के लिखित निर्देश लें। बढ़ता दर्द, बुखार, दुर्गंध वाला स्राव या बढ़ता रक्तस्राव हो तो शीघ्र सलाह लें। बहुत खून आने या बेहोशी जैसा लगने पर तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
आम सवाल
क्या छोटी गांठ हमेशा इस तरह निकल सकती है?
नहीं। गुहा से उसका संबंध और मांसपेशी में गहराई भी जरूरी हैं।
क्या इसमें गर्भाशय निकाला जाता है?
नहीं। इसमें चुनिंदा गांठ निकाली जाती है। गर्भाशय निकालना अलग ऑपरेशन है।
क्या एक ही बार में पूरा इलाज हो जाएगा?
यह निश्चित नहीं है। सुरक्षित योजना के लिए कभी चरणों में इलाज चाहिए।
क्या बिना लक्षण की गांठ निकालना जरूरी है?
हमेशा नहीं। निगरानी या इलाज का चुनाव पूरी परिस्थिति के आधार पर होता है।
पूरा हटने की पुष्टि कैसे होती है?
ऑपरेशन के निष्कर्ष और लक्षणों की समीक्षा होती है। जरूरत पर दोबारा तस्वीरें या अंदर की जाँच की जा सकती है।
रक्तस्राव का विवरण और रिपोर्ट लेकर परामर्श लें। गर्भधारण संबंधी सवाल प्रजनन विशेषज्ञ टीम से अलग चर्चा करें।
