हड्डियों की कमजोरी बिना दर्द के भी बढ़ सकती है। डेक्सा रिपोर्ट के साथ पहले हुए फ्रैक्चर और व्यक्तिगत जोखिम देखकर आगे की देखभाल तय होती है।
किसी स्वास्थ्य शिविर में बताया गया कि हड्डियाँ कमजोर हैं। या माहवारी बंद होने के बाद किसी ने हड्डियों का स्कैन कराने को कहा। ऐसे में पहले यह समझना उपयोगी है कि पिछली जाँच में क्या मापा गया और अगली जाँच से कौन सा फैसला लेना है।
ऑस्टियोपोरोसिस वह स्थिति है जिसमें हड्डी के टूटने की आशंका बढ़ जाती है, कभी-कभी मामूली चोट से भी। शुरुआत में दर्द होना जरूरी नहीं है। हड्डियों का घनत्व जानने वाली जाँच मदद कर सकती है, लेकिन डॉक्टर केवल एक अंक देखकर पूरी देखभाल तय नहीं करते।
सीधे शब्दों में
डेक्सा स्कैन में बहुत कम मात्रा की एक्स-रे किरणों से हड्डी के खनिज घनत्व का माप लिया जाता है। आमतौर पर कूल्हे और रीढ़ के निचले हिस्से को देखा जाता है। उम्र, माहवारी बंद होना, छोटी चोट से पहले हड्डी टूटना या दूसरे जोखिम हों तो यह जाँच उपयोगी हो सकती है।
हर स्वस्थ युवा को यह स्कैन जरूरी नहीं है। हर जोड़ या कमर के दर्द की वजह भी इससे नहीं मिलती। खून की जाँच हड्डी का घनत्व नहीं मापती, इसलिए दोनों जाँचों का काम अलग है।
किन लोगों को डॉक्टर से बात करनी चाहिए?
खड़े होने की ऊँचाई से गिरने या उससे भी छोटी चोट पर हड्डी टूटी हो तो जरूर बताएँ। माता या पिता के कूल्हे का फ्रैक्चर, उम्र से पहले माहवारी बंद होना, बार-बार गिरना, बहुत कम वजन या हड्डियों को प्रभावित करने वाली बीमारी भी महत्वपूर्ण है। चल रहे सभी उपचारों की जानकारी साथ रखें।
उम्र एक बात है, लेकिन वही अकेला नियम नहीं है। डॉक्टर दूसरे जोखिम जोड़कर अनुमान लगा सकते हैं कि स्कैन से इलाज का फैसला बदलेगा या नहीं। पहले हल्की चोट से फ्रैक्चर हो चुका हो तो रिपोर्ट बहुत कम घनत्व न दिखाए, तब भी देखभाल की जरूरत हो सकती है।
पुरुषों में भी ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है। इसे केवल माहवारी बंद होने के बाद महिलाओं की समस्या मानना सही नहीं है। महिलाओं में उस उम्र की दूसरी स्वास्थ्य बातों के लिए रजोनिवृत्ति की जाँच पर हमारा लेख उपयोगी है।
डेक्सा, साधारण एक्स-रे और खून की जाँच में फर्क क्या है?
ये जाँचें अलग-अलग सवालों का जवाब देती हैं। शिविर में एड़ी की जाँच हुई हो तो उसका नतीजा साथ लाएँ। एड़ी की हर जाँच को कूल्हे और रीढ़ के डेक्सा स्कैन के बराबर नहीं माना जा सकता।
| जाँच या जानकारी | मुख्य उपयोग |
|---|---|
| कूल्हे और रीढ़ का डेक्सा स्कैन | मापी गई हड्डियों का घनत्व और फ्रैक्चर के जोखिम की समझ |
| साधारण एक्स-रे | हड्डी टूटने या बनावट की दूसरी समस्या की पहचान |
| चुनी हुई खून की जाँच | हड्डी कमजोर होने में योगदान देने वाली स्वास्थ्य समस्या का पता |
| पहले हुए फ्रैक्चर और गिरने का विवरण | घनत्व के अंक से आगे का व्यक्तिगत जोखिम |
एक्स-रे सामान्य दिखने से ऑस्टियोपोरोसिस पूरी तरह खारिज नहीं होता। इसी तरह डेक्सा का अंक हर दर्द की वजह नहीं बताता। घुटने का घिसाव अलग समस्या है, हालांकि दोनों एक व्यक्ति में हो सकते हैं।
स्कैन के दिन क्या होता है?
आमतौर पर व्यक्ति खुले गद्देदार मेज पर लेटता है और मशीन का हिस्सा माप वाली जगह के ऊपर से चलता है। यह सुरंग जैसी बंद मशीन नहीं होती। किरणों की मात्रा कम होती है, फिर भी गर्भ की संभावना पहले बताना जरूरी है।
पुराने डेक्सा नतीजे, शरीर में लगे धातु के उपकरण या रीढ़ के पुराने ऑपरेशन की जानकारी लाएँ। हाल में किसी तस्वीर वाली जाँच में विशेष पदार्थ दिया गया हो तो वह भी बताएँ। तैयारी के लिए जाँच केंद्र के निर्देश मानें। अपना चल रहा उपचार खुद न बदलें।
आम हड्डी-घनत्व जाँच के लिए खाली पेट रहना अक्सर जरूरी नहीं होता। लेकिन साथ में दूसरी जाँच हो तो उसके निर्देश अलग हो सकते हैं। पहले पूछ लें कि आपको कौन सी तैयारी करनी है।
रिपोर्ट के अंक कैसे समझें?
रिपोर्ट में टी-स्कोर हड्डी के घनत्व की तुलना स्वस्थ युवा के मानक से करता है। माहवारी बंद हो चुकी महिलाओं और 50 वर्ष या अधिक उम्र के पुरुषों में उपयुक्त जगह का टी-स्कोर −1 या उससे अधिक आमतौर पर सामान्य घनत्व, −1 से कम लेकिन −2.5 से ऊपर कम घनत्व और −2.5 या उससे कम ऑस्टियोपोरोसिस की पहचान में मदद करता है।
ये सीमाएँ यह पक्का नहीं बतातीं कि किसकी हड्डी टूटेगी। कम उम्र के लोगों में अक्सर ज़ेड-स्कोर और उनकी स्वास्थ्य स्थिति देखी जाती है। बच्चों पर वयस्कों के अंक वाले नियम सीधे लागू नहीं होते। डॉक्टर से पूछें कि आपकी उम्र में कौन सा माप उपयुक्त है।
शरीर की स्थिति, रीढ़ का घिसाव, धातु के उपकरण और इस्तेमाल हुई मशीन नतीजे पर असर डाल सकते हैं। दो रिपोर्टों में छोटा फर्क हमेशा असली बदलाव नहीं होता। जहाँ संभव हो, आगे की तुलना उसी उपयुक्त मशीन पर की जाती है।
रिपोर्ट के बाद देखभाल कैसे तय होती है?
डॉक्टर गिरने के जोखिम, संतुलन, खाने की जरूरत, गतिविधि और हड्डियों को प्रभावित करने वाले दूसरे कारण देखते हैं। जरूरत होने पर व्यक्तिगत उपचार चुना जाता है। व्यायाम की सलाह पहले के फ्रैक्चर, ताकत और संतुलन के अनुसार होनी चाहिए।
कम घनत्व का मतलब यह नहीं कि सामान्य जीवन बंद कर देना है। सामान्य अंक भी हर जोखिम समाप्त नहीं करता। कुछ लोगों में थायरॉइड की समस्या प्रासंगिक हो सकती है, लेकिन केवल डेक्सा से कारण की पहचान नहीं होती। अगली मुलाकात और दोबारा जाँच का समय स्पष्ट करें।
कब जल्दी दिखाना चाहिए?
जोखिम समझने या पुरानी रिपोर्ट पर बात करने के लिए सामान्य मुलाकात तय करें। नई लगातार कमर की तकलीफ, लंबाई घटना या पीठ की बनावट बदलने पर जल्दी जाँच कराएँ। इसे केवल उम्र का असर मानकर न छोड़ें।
गिरने के बाद अचानक तेज दर्द या पैर पर वजन न रख पाना हो तो तत्काल चिकित्सकीय जाँच जरूरी है। सामान्य डेक्सा की तारीख का इंतजार करने से संभावित फ्रैक्चर की जाँच में देरी नहीं होनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बिना दर्द के ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है?
हाँ। हड्डी की ताकत कम होने पर फ्रैक्चर से पहले कोई खास लक्षण न हो सकता है। इसलिए जाँच का फैसला केवल दर्द के आधार पर नहीं होता।
क्या खून में कैल्शियम कम होने से इसकी पुष्टि हो जाती है?
नहीं। खून की जाँच दूसरे कारण समझने में मदद कर सकती है, लेकिन हड्डी का घनत्व नहीं मापती। डॉक्टर जरूरत के अनुसार सही जाँच चुनते हैं।
क्या एड़ी की जाँच के बाद इलाज शुरू कर देना चाहिए?
ऐसा न करें। एड़ी का नतीजा आगे समीक्षा का कारण हो सकता है, लेकिन वह हर स्थिति में केंद्रीय डेक्सा के बराबर नहीं है। पूरा इतिहास और उपयुक्त माप जरूरी हैं।
कम घनत्व आने पर क्या हर किसी को उपचार चाहिए?
हर व्यक्ति को एक जैसा उपचार नहीं चाहिए। पहले हुए फ्रैक्चर और कुल जोखिम के आधार पर निगरानी या अतिरिक्त देखभाल तय होती है।
क्या हर साल डेक्सा कराना जरूरी है?
नहीं। सबके लिए सालाना नियम नहीं है। पहला नतीजा, चल रही देखभाल और दोबारा जाँच से फैसला बदलने की संभावना देखकर समय चुना जाता है।
पूरी रिपोर्ट के साथ हड्डी और जोड़ विभाग में सलाह लें या मुलाकात का समय तय करें। पूछें कि नतीजे से आपकी देखभाल में क्या बदलाव होगा और अगली समीक्षा कब करनी है।
