सुबह या देर तक बैठने के बाद एड़ी के नीचे दर्द प्लांटर फैसाइटिस का संकेत हो सकता है। सही कारण समझने के लिए दर्द की जगह और डॉक्टर की जाँच जरूरी है।
सुबह बिस्तर से उतरते ही एड़ी के नीचे चुभन होती है। कुछ देर चलने पर कम लगती है, लेकिन लंबे समय खड़े रहने के बाद फिर लौट आती है। कई लोग बिना चोट लगे यह तकलीफ महसूस करते हैं और सोचते हैं कि शायद हड्डी बढ़ गई होगी।
इस तरह का दर्द प्लांटर फैसाइटिस में हो सकता है। पैर के तलवे में एड़ी से आगे तक मजबूत ऊतक की एक पट्टी होती है, जो पैर की मेहराब को सहारा देती है। इसे प्लांटर फैशिया कहते हैं। एड़ी के पास इसके जुड़ने वाली जगह में परेशानी से दर्द हो सकता है, लेकिन हर एड़ी का दर्द इसी वजह से नहीं होता।
सीधे शब्दों में
नींद या लंबे आराम के बाद पहले कदमों में एड़ी के नीचे दर्द होना एक पहचान योग्य संकेत है। फिर भी डॉक्टर आपकी बात सुनकर और पैर की जाँच करके कारण तय करते हैं। हर व्यक्ति को स्कैन नहीं चाहिए। एक्स-रे में एड़ी का काँटा दिखना अपने आप ऑपरेशन की जरूरत साबित नहीं करता।
ज्यादातर लोगों के लिए शुरुआत बिना ऑपरेशन वाली देखभाल से होती है। काम और गतिविधियों का बोझ, जूतों का सहारा और विशेषज्ञ की देखरेख में व्यायाम की योजना देखी जाती है। सुधार में कई महीने लग सकते हैं; कुछ दिनों में निश्चित रूप से ठीक करने का वादा भरोसेमंद नहीं है।
डॉक्टर को दर्द के बारे में क्या बताएं?
दर्द की जगह उंगली से दिखाएं। क्या वह एड़ी के नीचे है, पीछे है या पूरे तलवे में फैलता है? सुबह, बैठकर उठने, देर तक खड़े रहने और काम खत्म होने के बाद क्या फर्क पड़ता है? एक पैर में है या दोनों में, यह भी बताएं। जलन या झनझनाहट हो तो उसे अलग से समझाएं।
हाल में चलना, दौड़ना या खड़े रहने का समय बढ़ा हो तो जानकारी दें। दर्द कब शुरू हुआ और कितनी दूर चलने पर काम रुकता है, यह लिखकर लाएं। अलग-अलग उपचार आजमाने के बजाय लक्षणों का साफ विवरण कारण समझने में मदद करता है।
बिना चोट के तकलीफ कैसे शुरू हो सकती है?
बार-बार पड़ने वाला दबाव तलवे के ऊतक को परेशान कर सकता है। अचानक गतिविधि बढ़ना, कठोर जमीन पर लंबे समय खड़ा रहना, पिंडली का कसाव, शरीर का अधिक वजन और पैर की बनावट योगदान दे सकते हैं। इनमें से कोई एक बात दिखना कारण की पक्की पुष्टि नहीं है।
सपाट पैर वाले हर व्यक्ति को इलाज या विशेष जूते जरूरी नहीं होते। डॉक्टर पैर की चाल, रोज के काम और दर्द को साथ देखकर सलाह देते हैं। बच्चे के सपाट पैर के लिए बच्चों में सपाट पैरों की जाँच अलग से समझें। बड़े व्यक्ति के एड़ी दर्द की योजना बच्चे पर सीधे लागू न करें।
एड़ी में दर्द की दूसरी वजहें क्या हो सकती हैं?
| दर्द का तरीका | डॉक्टर किस बात पर विचार कर सकते हैं | इसका महत्व |
|---|---|---|
| आराम के बाद एड़ी के नीचे दर्द | तलवे के ऊतक की परेशानी | जाँच के बाद गतिविधि और व्यायाम की योजना बनती है |
| एड़ी के पीछे दर्द | अकिलीज़ नामक कंडरे की समस्या | कंडरे और उस पर पड़ते दबाव की जाँच चाहिए |
| जलन या झनझनाहट | नस से जुड़ी समस्या | संवेदना और नस की जाँच जरूरी हो सकती है |
| दौड़ या कूद अचानक बढ़ने के बाद दर्द | हड्डी पर बार-बार दबाव की चोट | अलग जाँच और गतिविधि की सीमा लग सकती है |
यह तालिका खुद निदान करने के लिए नहीं है। लक्षण आपस में मिल सकते हैं। मधुमेह वाले व्यक्ति में पैर की त्वचा, संवेदना और रक्त के बहाव पर भी ध्यान देना जरूरी है।
एक्स-रे या स्कैन कब मदद करता है?
डॉक्टर दर्द वाली जगह, टखने की गति, पिंडली का कसाव और चलने का तरीका देखते हैं। किसी दूसरी हड्डी या जोड़ की समस्या का शक हो तो एक्स-रे उपयोगी हो सकता है। असामान्य लक्षण, अस्पष्ट कारण या उचित देखभाल के बावजूद परेशानी बने रहने पर अल्ट्रासाउंड या MRI चुना जा सकता है।
एड़ी का काँटा उन लोगों में भी मिल सकता है जिन्हें दर्द नहीं है। इसलिए रिपोर्ट में काँटा लिखे होने से उसे निकालना जरूरी नहीं हो जाता। पूछें कि जाँच से कौन सा सवाल हल होगा और उसके परिणाम से उपचार में क्या बदलाव आएगा।
उपचार की योजना कैसे बनती है?
आमतौर पर शुरुआत पैर पर पड़ रहे अनावश्यक दबाव को घटाने और उपयुक्त गतिविधि बनाए रखने से होती है। डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट जाँच के अनुसार खिंचाव और मजबूती वाले व्यायाम तय कर सकते हैं। कुछ लोगों में जूतों की बनावट, गद्दी, अंदर के सहारे या रात में पहनने वाले सहारे पर चर्चा होती है।
हर व्यक्ति को वही उपकरण या व्यायाम नहीं चाहिए। दर्द बढ़ाने वाला व्यायाम जबरन न करें और केवल तस्वीर देखकर कोई सुधारक उपकरण न खरीदें। इंजेक्शन या दूसरी प्रक्रियाओं की सीमाएं और जोखिम होते हैं; वे अपने आप अगला कदम नहीं हैं। लंबे समय की उचित गैर-ऑपरेशन देखभाल के बाद भी महत्वपूर्ण परेशानी रहे, तभी निदान दोबारा देखकर ऑपरेशन पर विचार किया जाता है।
सुधार का पता कैसे चलेगा?
सुबह के पहले कदम का दर्द, चलने की दूरी और काम या खेल में भाग लेने की क्षमता की तुलना करें। सुधार हर सप्ताह एक जैसी गति से नहीं होता। तय मुलाकात में बताएं कि योजना का कौन सा हिस्सा निभाना कठिन था। इससे सलाह को आपकी नौकरी और दिनचर्या के अनुसार बदला जा सकता है।
दौड़ना या लंबे समय खड़े रहना फिर शुरू करने से पहले चर्चा करें। थोड़ी दूर बिना दर्द चले पाना पूरे दिन के बोझ के लिए तैयार होने का प्रमाण नहीं है। रोज पहने जाने वाले जूते और पुरानी रिपोर्ट साथ लाएं। डॉक्टरों की जानकारी या अस्पताल की टीम से उचित विशेषज्ञ चुनने में सहायता लें।
जल्दी जाँच कब जरूरी है?
दर्द बार-बार लौटे, चलना कठिन हो, सुन्नपन हो या पैर की आकृति बदले तो जाँच कराएं। मधुमेह में नया घाव या लालिमा हो तो जल्दी डॉक्टर से मिलें। चोट के बाद पैर पर वजन न रख पाना, बुखार के साथ गर्म सूजा पैर या तेजी से बढ़ती तकलीफ में तत्काल चिकित्सा जाँच जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सुबह एड़ी का दर्द होना पक्का प्लांटर फैसाइटिस है?
नहीं। यह एक उपयोगी संकेत है, पर कंडरे, नस, हड्डी या जोड़ की समस्या भी मिलती-जुलती लग सकती है। दर्द की जगह और शारीरिक जाँच से सही कारण समझा जाता है।
क्या एड़ी का काँटा निकलवाना पड़ेगा?
अक्सर उसकी जरूरत नहीं होती। काँटा बिना दर्द भी रह सकता है और प्लांटर फैसाइटिस का उपचार आमतौर पर उसे निकाले बिना होता है। डॉक्टर से पूछें कि रिपोर्ट का निष्कर्ष आपके दर्द से जुड़ा है या नहीं।
क्या पहली जाँच MRI होनी चाहिए?
सामान्य लक्षणों में प्रायः नहीं। खास चिंता, निदान में संदेह या लगातार बनी परेशानी में डॉक्टर इसे चुन सकते हैं। महंगी जाँच अपने आप बेहतर शुरुआती जाँच नहीं बन जाती।
क्या दर्द खत्म होने तक बिल्कुल चलना बंद कर दूँ?
हर व्यक्ति को पूरी तरह आराम की जरूरत नहीं होती। कारण, दर्द और किसी हड्डी की चोट के शक को देखकर सुरक्षित गतिविधि तय होती है। अपनी स्थिति के लिए सीमा डॉक्टर से समझें।
ठीक होने में कितना समय लगता है?
कई महीने लग सकते हैं और समय व्यक्ति के अनुसार बदलता है। पूछें कि अगली मुलाकात तक किस सुधार की उम्मीद है और कब निदान या योजना की दोबारा जाँच करनी होगी।
लगातार एड़ी दर्द के लिए अस्पताल की सेवाओं के माध्यम से हड्डी-जोड़ विशेषज्ञ से मिलें या परामर्श बुक करें। सुबह के दर्द और पूरे दिन के काम का विवरण साथ लाएं।
